छू ले आसमान ज़मीन की तलाश ना कर, जी ले ज़िंदगी खुशी की तलाश ना कर, तकदीर बदल जाएगी खुद ही मेरे दोस्त, मुस्कुराना सीख ले वजह की तलाश ना कर.
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ज़िन्दगी वो जो गुज़र जाये, आंसू वो जो बह जाये, ख़ुशी वो जो मिल जाये, ग़म वो जो बीत जाये, मगर दोस्त वो जो हमेशा साथ निभाऐ |
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चंपा के दस फुल, चमेली की एक कली, मुरख की सारी रात, चतुर की एक घडी
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अपनी तक़दीर में तो कुछ ऐसा ही सिलसिला लिखा है, किसी ने वक़्त गुजारने के लिए अपना बनाया, तो किसी ने अपना बना कर वक़्त गुज़ार लिया……..
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कागज़ पर रख कर खाना खाये तो भी कैसे…. खून से लथपथ आता है अखबार आजकल!
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