दान की महिमा

एक भिखारी सुबह-सुबह भीख मांगने निकला। चलते समय उसने अपनी झोली में जौ के मुट्ठी भर दाने डाल दिए, इस टोटके या अंधविश्वास के कारण कि भिक्षाटन के लिए निकलते समय भिखारी अपनी झोली खाली नहीं रखते। थैली देखकर दूसरों को भी लगता है कि इसे पहले से ही किसी ने कुछ दे रखा है। पूर्णिमा का दिन था, भिखारी सोच रहा था कि आज अगर ईश्वर की कृपा होगी तो मेरी यह झोली शाम से पहले ही भर जाएगी। अचानक सामने से राजपथ पर उसी देश के राजा की सवारी आती हुई दिखाई दी। देने से कोई चीज कभी घटती नहीं। लेने वाले से देने वाला बड़ा होता है। भिखारी खुश हो गया। उसने सोचा कि राजा के दर्शन और उनसे मिलने वाले दान से आज तो उसके स ... read more
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सूझबूझ से सुलझा लें समस्या

एक किसान था, वह अपने खेतों में काम कर घर लौट रहा था। रास्ते में ही एक हलवाई की दुकान थी। उस दिन किसान ने कुछ ज्‍यादा काम कर लिया था और उसे भूख भी बहुत लग रही थी। ऐसे में जब वह हलवाई की दुकान के पास से गुजरा तो उसे मिठाइयों की खुशबू आने लगी। वह वहां खुद को रोके बिना नहीं रह पाया। लेकिन उस दिन उसके पास ज्यादा पैसे नहीं थे, ऐसे में वह मिठाई खरीद नहीं सकता था, तब वह कुछ देर वहीं खड़े होकर मिठाइयों की सुगंध का आनंद लेने लगा। जब मिठाईवाले ने किसान को मजे से उसकी दुकान की मिठाइयों की खूशबू का आनंद लेते देखा, तब उससे किसान की खुशी देखी नहीं गई, वह किसान के पास गया और बोला, पैसे निकालो। किसान हैरान ह ... read more
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पिकासो की मिलियन डॉलर पेंटिग

पिकासो स्पेन में जन्मे एक बहुत मशहूर चित्रकार थे। उनकी पेंटिंग दुनियाभर में करोड़ों और खरबों रुपए में बिका करती थीं। दुनियाभर के लोग उनकी पेंटिंग के दीवाने थे। एक बार पिकासो किसी काम से कहीं जा रहे थे, तभी वे रात को किसी छोटे शहर में हॉटल में रुके। वहां के लोग उन्हें नहीं पहचानते थे कि वे इतने मशहूर चित्रकार हैं। लेकिन उसी होटल में ठहरी हुई एक महिला की नजर उन पर पड़ी और वे पिकासो को पहचान गईं। अब ये महिला पिकासो के पास गई और बोली, सर मैं आपकी बहुत बड़ी फैन हूं। प्लीज, मेरी लिए एक पेंटिंग बना दीजिए। पिकासो ने कहा : अभी फिल्हाल मेरे पास यहां पेंटिग का कोई सामान नहीं है। मैं फिर कभी बना दूंगा। म ... read more
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बकरी की सहेलियां (दोस्ती की परख)

एक बार की बात है, एक बकरी थी। वो बहुत खुशी-खुशी अपने गांव में रहती थी। वो बहुत मिलनसार थी। बहुत सारी बकरियां उसकी सहेलियां थीं। उसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। वो सभी से बात कर लेती थी और सभी को अपना दोस्त मान लेती थी। सभी कुछ अच्छा चल रहा था। लेकिन एक बार वो बकरी बीमार पड़ी और इस कारण वह धीरे-धीरे कमजोर होने लगी इसलिए अब वो पूरा-पूरा दिन घर पर ही बिताने लेगी। बकरी ने जो खाना पहले से अपने लिए जमा करके रखा था, अब वो भी खत्म होते जा रहा था। एक दिन उसकी कुछ बकरी सहेलियां उसका हाल-चाल पूछने उसके पास आईं, तब ये बकरी बड़ी खुश हुई। इसने सोचा कि अपनी सहेलियों से कुछ और दिनों के लिए वह खाना मंगव ... read more
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एक समय की बात

एक समय की बात है। मालवा में अकाल पड़ गया। वहां के राजा सोचने लगे, क्या किया जाए? नदियां सूख रही हैं। कहीं भी पानी नहीं। क्यों न कुएं खुदवाए जाएं, तभी प्रजा का पालन हो सकेगा। कुएं खोदते-खोदते महीनों बीत गए। पानी नहीं निकलना था, सो नहीं निकला। राज्य के पंडितों-जानकारों को बुलाया गया। कोई हल नहीं निकला। एक चालाक प‍ंडित ने कुछ सोचकर कहा- 'ये सब जलदेवी का प्रकोप है। वे तभी मानेंगी ‍जब किसी की बलि दी जाए। जमीन में जैसे ही किसी के खून की बूंद गिरेगी वो पानी से भर जाएगा। शर्त यह है कि वह 11 वर्ष का हो, उसके घुंघराले बाल हों और जिसके एक हाथ में छ: अंगुलियां हों।' इतना कहकर एक शैतानी मुस्कान से ... read more
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